Poetry in Hindi Gunjchand

Poetry in Hindi Gunjchand

तू देख अब मैं तुझसे नफरत किस तरह करती हूं

 आज तेरी याद को अपनी जिंदगी से दफा करती हूं

और अब मैं मोहब्बत तुझसे कुछ इस तरह करती हूं

 तु सामने आ जाए  तो तुझे लगा लूं गले 

 तु सामने आ जाए  तो तुझे लगा लूं गले 

इससे  अच्छा  मैं मरने की दुआ करती हूं,

तू देख अब मैं तुझसे नफरत किस तरह करती हूं 

तुझसे जुड़ी हर चीज से इस कदर किनारा कर लिया है मैंने 

तुझसे जुड़ी हर चीज से इस कदर किनारा कर लिया है मैंने 

कि मैं अपने ही शहर को तेरा शहर कहती हूं

और वह मेरे झुमका जो आज तक तेरी गाड़ी में है

और मेरा जो आज तक गाड़ी में है

 उस के दूसरे हिस्से को भी मैं आज दफन करती हूं 

और तू देख मैं तुझसे नफरत किस तरह करती हूं 

 मेरे जज्बातों से खेल कर भाग जाना इतना आसान नहीं 

 मेरे जज्बातों से खेल कर भाग जाना इतना आसान नहीं 

 तेरी बेवफाई को अपनी कागज और कलम में कैद करती हूं 

और जब जब बेवफाई की बात उठी कि तेरा नाम आएगा 

 तू देख अब मैं तुझसे नफरत किस तरह करती हू 

आज मै हर एक शायर को तेरे नाम से  इठला करती हू  , 

अब तू देख मै तुझसे नफरत किस तरह करती हू 

बड़ा शोक था न तुझे लड़कियों के गुडबुक्स  मै आने का ,

चल आज मै तुझे शयारो की  महफ़िल मै तुझे मशहूर  करती हू

अपने ये दो कोड़ी के गुरूर को अपने जेब मै  रख 

अपने ये दो कोड़ी के गुरूर को अपने जेब मै  रख

क्युकी  आज मै तेरे हर एक गुरूर को चकना चूर करती हू 

अब तू देख मै तुझसे नफरत किस तरह करती हू 

आज मै तेरी हर याद को दिल से दफा करती हू 

अब तू देख मै तुझसे नफरत किस तरह करती हू 

written by goonj chand

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